प्रकाश की उत्पत्ति के मुख्य सिद्धांत

प्रकाश की उत्पत्ति के मुख्य सिद्धांत

  1. कणिका सिद्धांत-न्यूटन
  2. तरंग सिंद्धांत-हाइजिन
  3. फोटोन सिद्धांत-आइंस्टीन

आइंस्टीन के फोटोन सिद्धांत की पुष्टि 1921 में कॉम्पटन ने की

प्रकाश तरंग – अनुप्रस्थ एवं विधुत चुम्बकीय तरंग होती है|

प्रकाश की तीव्रता के आधार पर वस्तुओं के निम्न भाग किए जाते है-

प्रदीप्त वस्तुएँ क्या होती है?

प्रदीप्त वस्तुएँ :- प्रदीप्त वस्तुएँ वे वस्तुएँ है, जो अपने स्वयं के प्रकाश से प्रकाशित होती है| जैसे –सूर्य, विधुत बल्ब आदि|

अप्रदीप्त वस्तुएँ क्या होती है?

अप्रदीप्त वस्तुएँ – अप्रदीप्त वस्तुएँ, वे वस्तुएँ है, जिनका अपना स्वयं का प्रकाश नही होता, लेकिन उन पर प्रकाश डालने पर वे दिखायी देने लगती है| जैसे –मेज, किताब, कुर्सी आदि|

अर्धपारदर्शक वस्तुएँ क्या होती है?

अर्धपारदर्शक वस्तुएँ – कुछ वस्तुएँ ऐसी होती है, जिन पर प्रकाश की किरणें पड़ने से प्रकाश का कुछ भाग तो अवशोषित हो जाता है, तथा कुछ भाग बाहर निकल जाता है| जैसे –तेल लगा हुआ कागज|

पारदर्शक वस्तुएँ क्या होती है?

पारदर्शक वस्तुएँ – पारदर्शक वस्तुएँ वे वस्तुएँ है, जिनमें होकर प्रकाश की किरणें बाहर निकल जाती है| जैसे –काँच आदि|

अपारदर्शक वस्तुएँ क्या होती है?

अपारदर्शक वस्तुएँ – अपारदर्शक वस्तुएँ वे है, जिनमें होकर प्रकाश की किरणें बाहर नही निकल पातीं| जैसे –धातुएँ आदि|

प्रकाश का परावर्तन क्या है?

प्रकाश का परावर्तन(Reflection of Light)

प्रकाश का परावर्तन निम्न दो नियमो के अनुसार होता है-

  1. आपतित किरण, अपवर्तित किरण एवं आपतित बिन्दु पर डाला गया अबिलम्ब एक ही तल में होते है|
  2. आपतन कोण का मां परावर्तन कोण के बराबर होता है| यदि i आपतन कोण एवं r परावर्तन कोण हो तो <i=<r

समतल दर्पण प्रकाश का सबसे अच्छा परावर्तन माना जाता है|

पाश्र्व उत्क्रमण : समतल दर्पल में देखने से हमारा दाया हाथ प्रतिबिम्ब का बाया हाथ तथा हमारा बाया हाथ प्रतिबिम्ब का दाया हाथ दिखाई पड़ता है| इन घटना कोपाश्र्व उत्क्रमण कहते है|

प्रकाश का अपवर्तन किसे कहते है?

प्रकाश का अपवर्तन(Refraction of Light)

प्रकाश का एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करते समय उनकी(दोनों माध्यमों की) सीमा पर अपने रेखीय पथ से विचलित होना ही प्रकाश का अपवर्तन कहलाता है|

प्रकाश का अपवर्तन का नियम

अपवर्तन नियम :-

  1. आपतित किरण, परावर्तित किरण एवं आपतन बिन्दु पर डाला गया अभिलम्ब एक ही तल में होते है|
  2. sin i/sin i =नियंताक =u(अपवर्तनांक)

जहाँ i = आपतन कोण, r =अपवर्तन कोण |

दूसरा नियम स्नेल का नियम भी कहलाता है|

जब प्रकाश की कोई किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह दोनों माध्यमों के के पृष्ठ पर खींचे गए अभिलम्ब की ओर झुक जाती है|

जब प्रकाश की कोई किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह अभिलम्ब से दूर हट जाती है|

प्रकाश के अपवर्तन के उदाहरण

  1. पानी में पड़ी हुई कोई लकड़ी बाहर से तिरछी दिखाई देती है|
  2. रात्रि के समय तारो का टिमटिमाना|
  3. जल के अंदर पड़ी मछली अपनी वास्तविक गहराई से कुछ उठी हुई दिखाई देती है|

पूर्ण आंतरिक परावर्तन क्या है?

पूर्ण आंतरिक परावर्तन – जब कोई प्रकाश की किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है तो अपवर्तन के कारण अपवर्तित किरण अभिलंब से दूर हटती जाती है जब एक निश्चित आपतन कोण के लिए अपवर्तन कोण का मान 90 हो जाता है तो इस आपतन कोण को कांतिक कोण कहते है|

यदि सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाती हुई आपतित किरण दोनों माध्यमों के सीमा पृष्ठ पर इस प्रकार आपतित हो कि आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से बड़ा हो जाए तो इस अवस्था में अपवर्तित किरण पुनः सघन माध्यम में लौट आती है अर्थात् आपतित किरण, परावर्तित होकर पुनः उसी माध्यम में लौट आती है| इसी घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते है|

उदाहरण – हीरे का चमकना,रेगिस्तान में मरीचिका |

प्रकाशिकी क्या होता है|

प्रकाश

प्रकाश वह भौतिक कारण है, जिसके द्वारा हमे वस्तुओं को देखने की अनुभूति प्राप्त होती है| वास्तव में प्रकाश एक ऊर्जा, जिसकी अनुभूति हम आँखों द्वारा करते है|

विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल

निर्वात : 3.00 ×108 मी/से.;

पानी : 2.25 ×108;

काँच : 2.00 ×108 ;

तारपीन तेल : 2.04 ×108 मी/से;

नाइलोन :1.96 ×108 मी/से.;

सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक आने में लगभग 500 सेकेण्ड या 8 मिनट लगते है| प्रकाश का वेग ज्ञात करने में रोमर, ब्राडली, फीजो, फोकाल्ट आदि वैज्ञानिको के योगदान महत्वपूर्ण है|

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