कैंसर का इतिहास तथा कैंसर रोग के प्रकार

दोस्तों आज हम इस लेख में कैंसर कोशिका रूपान्तरण के अंतर्गत में कैंसर के प्रकार, ट्यूमर के प्रकार, कैंसर कोशिकाओं की विशेषताएँ तथा कोशिका रूपान्तरण का वर्गीकरण किया है|

कैंसर का इतिहास

सजीवों में वृद्धि, मरम्मत तथा अन्य लक्षणों युग्मको के निर्माण हेतु कोशिका विभाजन उत्तरदायी है, जो एक नियन्त्रित तथा सामान्य प्रक्रिया है| लेकिन कुछ विशेष असामान्य परिस्थितियों में विभिन्न कारकों के प्रभाव से कोशिका विभाजन एक अनियमित तथा अनियन्त्रित प्रक्रम में परिवर्तित हो जाता है, यह कोशिकाओं का रोग बन जाता है|

कैंसर कोशिकाओं का अनियमित विभाजन है| सामान्यतया एक समय पर किसी भी प्रकार की कोशिकाओं की संख्या निश्चित होती है| कैंसर कोशिकाएँ आकार एवं संख्या में अनियन्त्रित वृद्धि करती है तथा अर्बुद या निओप्लाज्म का निर्माण करती है| कैंसर का वास्तविक कारण ज्ञात नही है|

ऐसा माना जाता है कि कुछ ओंकोजीन शरीर में होते है| कुछ जीन जिन्हें प्रोटोओंकोजीन कहते है, शरीर की सामान्य वृद्धि एवं परिवर्धन में सहायक है| किसी उत्परिवर्तन या विषाणु संक्रमण के फलस्वरूप ये कोशिकाएँ शरीर द्वारा नियन्त्रण में नही रहती तथा लगातार विभाजन करती है| इस प्रकार इन कोशिकाओं के समूह द्वारा ट्यूमर या कैंसर अति वृद्धि का निर्माण होता है|

ट्यूमर के प्रकार (types of tumour)

ट्यूमर को उसके स्वभाव एवं जैव-चिकित्सीय परीक्षणों के आधार पर दो प्रकारों में विभक्त किया जा सकता है|

(1) बेनाइन ट्यूमर (benign or non-malignant tumour) :-

शरीर के किसी विशिष्ट भाग में उद्गम के स्थान पर, कैप्सूल के रूप में वृद्धि प्रदर्शित करने वाले ये ट्यूमर घातक नही होते है तथा उत्पत्ति स्थल तक ही सीमित रहते है| ये ट्यूमर शरीर के अन्य भागों में स्थानान्तरित नही होते है| इस प्रकार के ट्यूमर मस्तिष्क आदि अंगो में घातक हो सकते है| यदि यह ट्यूमर संयोजी ऊतक की बनी झिल्ली के भीतर ही स्थित रहता है, तब इसे सुदम ट्यूमर कहते है| यह कैंसर नही होता है|

(2) मेलिग्नेन्ट ट्यूमर :-

इस प्रकार के ट्यूमर को दुर्दम ट्यूमर कहते है| यह कैंसर होता है| कैंसर जनित कोशिकाएँ रुधिर तथा लसिका के साथ दूसरे अंगो में पहुँच जाती है, जहाँ पहुँचकर ये द्वितीयक ट्यूमर बनाती है, जिसे रोग विक्षेपण कहते है| ये ट्यूमर शरीर के अन्य भागों पर भी उत्पन्न हो सकते है तथा ये घातक सिद्ध होते है|

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कैंसर के प्रकार (types of cancer)

कैंसर केवल एक रोग ही नही है अपितु बहुत से विभिन्न रोगों का जटिल रूप है, कैंसर ऊतक को बायोप्सी जाँच के आधार पर निम्न भागों में विभक्त किया जा सकता है|

  1. कार्सीनोमा (carcinoma)– इस प्रकार के कैंसर सम्बंधित भागों की एपीथिलियम ऊतक की कोशिकाओं में बनते या विकसित होते है तत्पश्चात् एक्टोडर्म या एण्डडर्म से बनने वाले अंगो में अपना प्रभाव दर्शाते है| ये लगभग 85-89%तक पाए जाते है; जैसे- त्वचा, सर्वाइकल भाग, स्तन, आमाशय एवं फेफड़ो में उत्पन्न होने वाले कैंसर|
  2. सार्कोमा (sarcoma)– यह मीसोडर्म पेशियाँ तथा संयोजी ऊतक से उत्पन्न होने वाले शारीरिक अंगो में विकसित होता है, सार्कोमा कैंसर का नामकरण, इसके उद्गम स्थान के नाम पर करते है; जैसे- लाइपोसर्कोमा, वसीय ऊतकों का कैंसर है, फ्राइब्रोसर्कोमा फाइब्रस संयोजी ऊतक का कैंसर है| यह लगभग 2-5% तक मिलते है|
  3. लिम्फोमास (lymphomas)– ये लिम्फॉयड अंगो; जैसे-प्लीहा, थाइमस, अस्थि मज्जा में विकसित होता है| इस प्रकार के कैंसर लगभग 5-7% मिलते है|
  4. ल्यूकीमिया (Leukaemia) – यह श्वेत रुधिर कणिकाओं का कैंसर है,जिसको सामान्यता रुधिर कैंसर कहा जाता है| इस कैंसर में श्वेत रुधिर कणिकाओं की संख्या असामान्य रूप से अत्यधिक बढ़ जाती है| तथा विभिन्न अंगो एवं ऊतकों में छनकर पहुँच जाते है तथा इस सम्बंधित अंगो का आकार बढ़ जाने से ट्यूमर विकसित हो जाता है, इस प्रकार के कैंसर 4-6% तक पाए जाते है|

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कैंसर कोशिकाओं की विशेषताएँ (characteristics of cancer cells)

कैंसर कोशिकाओं का इलेक्ट्रोन सूक्ष्मदर्शी द्वारा अध्ययन करने पर कोशिकाओं में निम्नलिखित असामान्य लक्षण दिखाई देते है|

  1. केन्द्रक (Nucleus)- यह अत्यधिक बड़ा हो जाता है, जिसमें क्रोमेटिन पदार्थ अव्यवस्थित रूप से बिखरा हुआ प्रतीत होता है|
  2. गाल्जी बॉडीज Goigi bodies)- कैंसर कोशिकाओं का यह अंग सामान्य कोशिकाओं की अपेक्षा अत्यधिक विकसित पाया जाता जाता है|
  3. राइबोसोम तथा अन्त:प्रद्रव्यी जालिका – कैंसर कोशिकाओं में इन अंगो की मात्रा सामान्य कोशिका की अपेक्षा अधिक होती है, क्योंकि तीव्रता से विभाजन करती कोशिकाओं को अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है|
  4. माइटोकॉन्ड्रिया – कोशिका के ये अंगक फूल जाते है, जिसमें क्रिस्टी की संख्या कम दिखाई देती है| कैंसर कोशिकाओं में अमरत्व, सम्पर्क अवरोध में हास, कोशिकीय आकर्षण में कमी, आक्रमकता प्रोटियोलिटिक विकारों की अत्यधिक स्रावण आदि क्रियात्मक परिवर्तन देखे जा सकते है|

कोशिकाओं रूपान्तरण (cell transformation)

जब कोशिका के आनुवंशिक गुणों में बदलाव या परिवर्तन हो जाते है, तब कोशिका का फीनोटाइप भी परिवर्तित हो जाते है,यह प्रक्रम या परिघटना कोशिकीय रूपान्तरण कहलाती है| कोशिका का यह रूपान्तरण विभिन्न कारक, जैसे- जेनेटिक, गुणसूत्रीय असामान्यता तथा जीन उत्परिवर्तन एवं रासायनिक जैसे- बहुचक्रीय हाइड्रोकार्बन, एरोमेटिक एमीर, मस्टर्ड गैस एवं विनायल क्लोराइड, एस्बेस्टोस, आदि द्वारा प्रेरित होता है| इस प्रकार सामान्य कोशिका का कैंसर कोशिका में रूपान्तरण या परिवर्तन कार्सीनोजेसिस कहलाता है| कुछ कार्सिनोजन तथा सम्बंधित प्रभावित अंगो की एक तालिका नीचे दी गयी है|

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